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चमत्कारी इडाणा माता का मंदिर

 चमत्कारी इडाणा माता का मंदिर



दोस्तों क्या आपने ऐसे अद्भुत मंदिर के बारे में सुना है जहां की देवी अग्नि स्नान करती है यह चमत्कारी मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है यह मंदिर राजस्थान के उदयपुर शहर से 60 किलोमीटर दूर अरावली की विस्तृत पहाड़ियों के बीच स्थित है ।यह मेवाड़ का प्रमुख शक्तिपीठ इडाणा माताजी का मंदिर है। यह राजपूत समुदाय ,भील ,आदिवासी समुदाय सहित संपूर्ण मेवाड़ की आराध्य मां है ।यहां पर मां के चमत्कारिक दरबार की महिमा बहुत ही निराली है। जिसे देखने दूर-दूर से लोग यहां आते हैं ।मां का यह दरबार खुले एक चौक में स्थित है यह मंदिर  इडाणा उदयपुर मेंवल की महारानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ यह मंदिर हजारों साल पुराना है लेकिन माता की प्रतिमा की स्थापना का कोई इतिहास यहां के पुजारी को ज्ञात नहीं है ,बस इतना बताया जाता है कि वर्षों पूर्व यहां पर एक तपस्वी बाबा तपस्या किया करते थे बाद में धीरे-धीरे स्थानीय पड़ोसी गांव के लोग यहां आने लगे हजारों साल पुराने इस श्री शक्तिपीठ इडाणा माता मंदिर में सदियों से अग्निस्नान की परंपरा चली आ रही है यहां दर्शन के लिए गए भक्तों के अनुसार माता की मूर्ति  के आसपास कभी भी भीषण आग लग जाती है और यह अग्नि अपने आप ही बुझ भी जाती है ऐसा माना जाता है कि इडाणा माता यहां अग्नि से स्नान करती है। अग्नि स्नान के समय आग इतनी विकराल होती है कि 10 से 20 मीटर ऊंची लपटें उठाती है इससे इडाणा माता की प्रतिमा के आसपास रखा प्रसाद, श्रृंगार ,अन्य पूजन सामग्री आदि सब कुछ चलकर राख हो जाती हैं लेकिन इडाणा माता की जागृत प्रतिमा और धारण की हुई चुनरी पर आग का कोई असर नहीं होता है वास्तव में यह घटना किसी आश्चर्य से कम नहीं है कि अग्नि स्नान के बाद भी माता की प्रतिमा वर्षों पहले जैसी थी आज भी वैसी ही है जबकि इडाणा माता के अग्नि स्नान के समय उठने वाली लपटों से कई बार उस बरगद के पेड़ तक को नुकसान पहुंचा है जिसके नीचे सदियों से माता रानी विराजमान है। वहां के स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर में महीने में दो से तीन बार अपने आप ही अग्नि प्रज्वलित होने लगती है लेकिन अग्नि का रहस्य अभी तक कोई सुलझा नहीं पाया है ।कहा जाता है कि इसी अग्नि स्नान के कारण यहां मां का मंदिर नहीं बन पाया है, और माता खुले आसमान के नीचे निवास करती है। इस मंदिर में भक्तों की खास आस्था है क्योंकि यहां मान्यता है कि लकवा से ग्रसित रोगी यहां मां के दरबार में आकर ठीक हो जाते हैं और ठीक होने पर रोगी के परिजन चांदी या लकड़ी के अंग बनाकर चढ़ाते हैं। साथ ही संतान की मिन्नत रखने वाले दंपतियों द्वारा पुत्र प्राप्ति पर यहां झूला चढ़ाने की भी परंपरा है ।यहां भक्त अपनी मिन्नत पूर्ण होने पर त्रिशूल चढ़ाने आते हैं। माता की प्रतिमा के पीछे अनगिनत त्रिशूल लगे हुए हैं। यहां नवरात्रि पर भक्तों की काफी भीड़ रहती है इसके अतिरिक्त सभी प्रमुख त्योहार यहां धूमधाम से मनाए जाते हैं ।आश्चर्य से भरपूर इस अद्भुत मंदिर के दर्शन हेतु आपको भी कम से कम एक बार जरूर जाना चाहिए

Reshama Mehta

I have done B.ed and 4 years Bechelor of Hotel Management Course then I joined Hotel Industry , after marriage ,I left hotel industry then done my MBA in Human Resources Management, now i am taking care of my house and family.

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